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उत्तराखंड सरकार ने ब्लैक फंगस की दवाई को लेकर जारी की एसओपी, जानिए ब्लैक फंगस के लक्षण व बचाव के तरीके..

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उत्तराखंड में ब्लैक फंगस की दवा एंफोटेरिसिन बी के वितरण पर पूरी तरह से सरकार का नियंत्रण रहेगा। दवा केवल कोविड अस्पतालों, मेडीकल कॉलेजों और सरकार की अन्य चिकित्सीय संस्थाओं को ही उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए शासन ने मंगलवार को मानक प्रचालन प्रक्रिया (sop) भी जारी की। एसओपी के मुताबिक ब्लैक फंगस की दवा का वितरण एक अलग व्यवस्था के तहत होगा। इस व्यवस्था के तहत प्रदेश में दवा के भंडारण और मांग की पूर्ति करने के लिए कुमाऊं में डॉ. रश्मि पंत और गढ़वाल में डॉ. कैलाश गुनियाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

क्या है म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस)-

म्यूकोरमाइकोसिस एक तरह का फंगल (कवक) इंफेक्शन है, जो कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद पाया जा रहा है। इस बीमारी में आंख या जबडे मे इंफेक्शन होता है, जिसके बढ़ने पर मरीज की जान जा सकती है। इसके शुरूआती लक्षण आंखों और नाक के पास लालिमा व दर्द होता है साथ ही बुखार व खून की उल्टी भी आ सकती है।

ब्लैक फंगस इंफेक्शन के लक्षण-

आंखं व नाक के पास लालिमा चेहरे पर एकतरफा सूजन
बुखार, सिरदर्द, खांसी सांस लेने में तकलीफ या दर्द, खून भरी उल्टी, मानसिक स्थिति में बदलाव।

म्यूकरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस से कैसे बचें-

शुगर को कंट्रोल में रखें, कोविड के इलाज और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी ब्लड शुगर की जांच करते रहें। स्टीरॉयड को ध्यान से डॉक्टर की सलाह से ही लें। एंटीबॉयोटिक्स व एंटीफंगल दवाइयों का सावधानी से इस्तेमाल करें। निर्माण या उत्खनन, धूल वाले क्षेत्रों से बचने की कोशिश करें, एन-95 मास्क पहनें, तूफान और प्राकृतिक आपदाओं के बाद पानी से क्षतिग्रस्त इमारतों और बाढ़ के पानी के सीधे संपर्क से बचें। ऐसी गतिविधियों से बचें जिसमें धूल या मिट्टी से सीधे संपर्क शामिल हो। मिट्टी, काई या खाद जैसी सामग्री को संभालते समय दस्ताने पहनें, त्वचा के संक्रमण के विकास की संभावना को कम करने के लिए त्वचा की चोटों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं खासकर वह जब मिट्टी या धूल के संपर्क में हों।

क्या न करें-

किसी भी तरह के अलर्ट को इग्नोर ना करें, अगर आपको कोविड हुआ है तो बंद नाक को महज जुकाम मानकर हल्के में न लें। फंगल इंफेक्शन को लेकर जरूरी टेस्ट करवाने में देरी न करें।