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पर्यावरण गांधी की विदाई एक युगपुरुष व युग प्रवर्तक की विदाई भी है…

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दून विश्वविद्यालय के अंतर्गत सामाजिक विज्ञान स्कूल द्वारा कुलपति प्रोफेसर डॉ. सुरेखा डंगवाल के नेतृत्व में स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा जिन्हें पर्यावरण गांधी के नाम से भी जाना जाता है, को श्रद्धांजलि देने के लिए एक राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें लगभग देश विदेश से 180 लोगों ने प्रतिभाग किया। कुलपति डॉ सुरेखा डंगवाल ने बताया कि इस वेबीनार का मूल विषय स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा को श्रद्धांजलि देना एवं उनके जीवन दर्शन एवं एवं समाज में उनके द्वारा संपादित महान कार्यो के प्रति आभार एवं सम्मान व्यक्त करना था ताकि उनके द्वारा किए गए कार्यों को जन जागरूकता के माध्यम से निरंतर जारी रखा जा सके और भावी पीढ़ी समझ सके कि उत्तराखंड की भूमि में जन्में इस युगपुरुष व युग प्रवर्तक द्वारा कौन-कौन से सराहनीय कार्य किए गए, उनका दर्शन सामाजिक सद्भाव-समरसता, सादगी एवं गांधीवाद के मार्ग पर अग्रसर हो कर जीवन यापन कर व्यवहारिक रुप से गांधीवाद को आमजन तक पहुंचाना रहा है । उन्होंने कहा कि हमारा दायित्व होगा कि हम उनके जीवन दर्शन से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी के साथ उनके दर्शन का साक्षात्कार करा सकें।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डाँ वंदना शिवा ने स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के बारे में बताया कि उन्हें 70 के दशक में बहुगुणा जी के साथ कार्य करने का शुभ अवसर मिला। बहुगुणा जी के पर्यावरण संरक्षण के ऊपर विचार और उनकी नीतियां न केवल अतीत में, वल्कि वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है और वर्तमान समय की नीतियां विकास के नाम पर प्रकृति से छेड़छाड़ कर रही है वह एक गंभीर समस्या को आमंत्रित करने जैसा है। डाँ वंदना शिवा ने बताया कि कृतिम खाद्य पदार्थों से मानव जीवन में संकट बढ़ गया है जिस पर नियंत्रित करना आवश्यक है। ऐसे कई प्रसंग हैं जिन पर बहुगुणा जी के दर्शन वह आदर्श सदा सर्वदा प्रासंगिक रहेंगे।

स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के आंदोलनों में उनकी साथी रही राधा बहिन ने बताया कि उनका जीवन सादगी से पूर्ण था एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने विश्व भर में भ्रमण किया और जागरूकता फैलाई हमारा सौभाग्य रहा कि हमको उनके साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ उन्होंने समाज के प्रत्येक क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से समर्पण के साथ जीवन पर्यंत कार्य किया यह उनके व्यक्तित्व व जीवन दर्शन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। सुप्रसिद्ध भूवैज्ञानिक डॉ एस पी सती ने कहा कि यदि हम उनके आदर्शों पर चल सकते हैं तो यह उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता धूम सिंह नेगी जी ने अपने वक्तव्य में कहा की जन आंदोलनों में स्वर्गीय श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी हमेशा अग्रणी रहे।

उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक राजेंद्र डोभाल ने अपने बचपन में उनके साथ बिताए गए क्षणों का जिक्र किया और बताया कि वह हमेशा से उनकी सादगी से प्रभावित रहे हैं। पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बताया की पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा जल जंगल जमीन पर आमजन की भागीदारी को बढ़ाना चाहते थे। इसीलिए स्वर्गीय सुंदर लाल बहुगुणा के 95 वें जन्मदिन पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें 95 अखरोट के पेड़ लगाए जाएंगे।

कोट्यो यूनिवर्सिटी जापान से प्रोफेसर रोहन डिसूजा ने बताया कि उन्हें उत्तराखंड में स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के साथ जन आंदोलन करने का सौभाग्य मिला। प्रोफेसर कुसुम अरुणाचलम ने बताया कि बहुगुणा जी का संबंध दून यूनिवर्सिटी से गहरा रहा है वह विश्वविद्यालय के अनेक कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी सुनिश्चितकर हमारा मार्गदर्शन करते थे। सेवा इंटरनेशनल के मनोज बेंजवाल ने कहा बहुगुणा जी के आदर्शों और समाज के लिए उनके सुझाव हुए रास्ते पर चलकर हमारी संस्था समाज में कई कार्यक्रमों को संचालित कर रही हैं। कार्यक्रम का कुशल संचालन विवि के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एच सी पुरोहित, प्रो0 हर्ष डोभाल, डॉ राजेश भट्ट और डॉ नरेश मिश्रा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव ड़ॉ मंगल सिंह मंद्रवाल, प्रोफेसर केडी पुरोहित, प्रोफेसर भानु नैथानी, प्रोफेसर महावीर नेगी, प्रोफेसर एमएम सेमवाल, प्रोफ़ेसर वाईपी रेवानी, प्रोफेसर ए. के. तिवारी, डॉ. रवि दीक्षित, डॉ सुमन सिंह गुसाईं, देवेंद्र बूड़ाकोटी, आरिज मोहम्मद सहित देश व विदेश से कई शिक्षाविद् एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।