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विश्व जनसंख्या दिवस- कोरोना की वजह से जन्मदर 50 प्रतिशत तक घटने का दावा।

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दुनिया भर में बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागररूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत साल 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद द्वारा हुई थी। उस समय विश्व की जनसंख्या लगभग 500 करोड़ थी। तब से प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला जाता है और साथ ही लोगों को जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के लिए जागरूक किया जाता है।

इस वर्ष का विषय विशेष रूप से COVID-19 महामारी के समय में दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित है। वहीं लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने एक सर्वे में दावा किया है कि, कोरोना काल जनसंख्या में उछाल की बजाय गिरावट का कारण बनेगा। यूरोपीय देश इटली, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन की बात करें तो 18-34 साल की उम्र के 50 से 60 फीसदी युवाओं ने परिवार आगे बढ़ाने की योजना को एक साल तक के लिए टाल दिया है।

कोरोना के शुरुआती दौर मार्च-अप्रैल में लॉकडाउन के साथ यूनिसेफ समेत तमाम एजेंसियों ने अनुमान लगाया था कि दुनिया में जन्म दर तेजी से बढ़ेगी और अगले साल आबादी पर इसका असर दिखेगा। हालांकि मई-जून और जुलाई में कोरोना के बढ़ते कहर के साथ अब अमेरिका, यूरोप और तमाम एशियाई देशों में जन्म दर में 30 से 50 फीसदी तक कमी की अनुमान जताया गया है।

यूनिसेफ ने भारत में मार्च-दिसंबर के बीच सर्वाधिक दो करोड़ और चीन में 1.3 करोड़ बच्चे जन्म लेने का अनुमान लगाया था, हालांकि बदले हालात में इसमें कमी का अनुमान है। भारत के 13 राज्यों में प्रजनन दर पहले ही काफी नीचे आ चुकी है। सेव द चिल्ड्रेन के प्रोग्राम एवं पॉलिसी इंपैक्ट के निदेशक अनिंदित रॉय चौधरी ने कहा कि भारत के शहरी और ग्रामीण परिवेश में कोविड-19 का प्रभाव जन्म दर पर अलग-अलग दिख सकता है। कुपोषण, टीकाकरण, शिक्षा-स्वास्थ्य को ले लें तो कोविड का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर ही पड़ा है, ऐसे में युवा परिवार बढ़ाने या न बढ़ाने को लेकर क्या कदम उठाते हैं, यह आने वाले समय में पता चलेगा।

इसलिए अभी नहीं बढ़ाना चाहते परिवार-
कोरोना काल में बच्चे को जन्म देकर उन्हें मुश्किल में नहीं डालना चाहते परिवार
बेरोजगारी-तंगी के कारण शहरों में युवा दंपति बच्चा करने की योजना को टाला
कामकाजी युवाओं के पास बच्चा पालने का समय नहीं, डे केयर होम, क्रेच आदि बंद
कोरोना का टीकाकरण होने तक बच्चा नहीं चाहते तमाम देशों के दंपति
गर्भावस्था के दौरान अस्पताल या डॉक्टरों की उचित सुविधा न मिल पाने का भी डर
आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने, रोजगार, करियर को पहली प्राथमिकता दे रही नई पीढ़ी