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उत्तराखण्ड- 2020 रोजगार वर्ष घोषित, लेकिन रोजगार मेलों में किसी को नहीं मिला रोजगार।

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उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2020 को भले ही रोजगार वर्ष के रूप में घोषित किया हो लेकिन राज्य में युवाओं को सेवायोजन विभाग से रोजगार मेलों के जरिए रोजगार देने के मामले में वर्ष 2017 से शुरू हुई रफ्तार वर्ष 2020 में पूरी तरह थम गई। दैनिक अखबार हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में सिर्फ 1 रोजगार मेला लगा, लेकिन किसी एक को भी रोजगार नहीं मिला। जबकि 2017 में 172 रोजगार मेलों में 7515 युवाओं को रोजगार मिला।

उत्तराखण्ड में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सेवायोजन विभाग बेरोजगारों का न सिर्फ पंजीकरण कराता है, बल्कि रोजगार मेलों के जरिए रोजगार भी उपलब्ध कराता है। रोजगार मेलों के जरिए उद्योगों, संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों समेत तमाम दूसरे प्राइवेट सेक्टर में रोजगार उपलब्ध होते थे। रोजगार मेलों में कंपनियां युवाओं से सीधे संवाद स्थापित कर मौके पर ही रोजगार उपलब्ध कराती थी।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक इन रोजगार मेलों के जरिए रोजगार देने के मामले में 2017 से 2019 तक स्थिति ठीक से सामान्य रही। 2017-18 में 172 रोजगार मेलों में 31481 युवाओं ने भाग लिया। 7515 युवाओं को रोजगार भी मिला। 2018-19 में भी 5678 युवाओं, 2019-20 में 2709 को रोजगार मिला। मगर पंजीकरण और रोजगार के लिहाज से वर्ष 2020 बेहद खराब रहा। इस वर्ष सेवायोजन विभाग अब तक सिर्फ एक ही मेला लगा पाया जिसमें 699 युवाओं ने भाग लिया, चयन एक का भी नहीं हो पाया। इसके पीछे कोरोना महामारी बड़ा कारण माना जा रहा है, अखबार ने सेवायोजन विभाग के निदेशक बीएस चलाल के हवाले से लिखा है कि हर साल रोजगार मेलों के जरिए रोजगार उपलब्ध कराया गया, इस वर्ष कोरोना के कारण रोजगार मेले नहीं हो पाए। अब स्थिति सामान्य हो रही है, तो मेलों की संख्या बढ़ा कर रोजगार उपलब्ध कराय जाएगा।

2020 में सेवायोजन के माध्यम किसी भी युवा को रोजगार नहीं मिलने के मामले में कांग्रेस ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार रोजगार देने के मामले में पूरी तरह विफल रही है। नये रोजगार उपलब्ध कराना तो दूर, जो रोजगार थे वे भी सुरक्षित नहीं रह पाए। श्रम कानून भी इतने कमजोर कर दिए हैं कि कंपनियों को मनमानी का पूरा मौका मिला गया है। लाखों की संख्या में रोजगार छिन गए हैं। कोरोना से ज्यादा सरकार की लचर नीतियों का असर पड़ा है।

वहीं शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा है कि विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चल रही है। इस साल कोरोना बंदिश के चलते रोजगार मेले उम्मीद के अनुसार आयोजित नहीं हो पाए। हालात ठीक होने पर फिर से रोजगार मेले आयोजित कराकर युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।