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उत्तराखंड के इस कलाकार ने सीएम को लिखा खुला खत, युवा कलाकारों के रोजगार को लेकर जताई चिंता।

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उत्तराखण्ड की खूबसूरत वादियों में फिल्म निर्माण, पर्यटन एवं संस्कृति में रोजगारी की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन उत्तराखण्ड के युवाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। इसे हमारे सिस्टम की कमी कहें या कलाकारों के रोजगार के लिए स्पष्ट नीति न होना कहा जाए, जिससे यहां के कलाकार पलायन करने को मजबूर हैं। इस संबंध में अब नैनीताल निवासी इंद्ररीस मलिक (जो कि वर्ष 2000 से उत्तराखण्ड में फिल्म, रंगमंच व थियेटर के क्षेत्र में काम कर रहे हैं) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रदेश में लोक नाट्य/नाटक/ फिल्मस एवं पर्यटन/ संस्कृति एवं युवाओं को रोजगार के लिए सरकार को सुझाव दिए हैं।

राष्ट्रीय नॉट्य विद्यालय (N.S.D) नई दिल्ली से नाट्य कला में स्नातक इदरीस मलिक ने लिखा है कि पूरे उत्तराखण्ड में करीब 30 लोग राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (N.S.D) तथा 15 लोग फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट (F.T.I.I) पुणे से स्नातक हैं, पर इनका उपयोग कैसे किया जाय सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि नैनीताल से 19 छात्र N.S.D से स्नातक हैं जिन्होंने नाटकों एवं फिल्मों में हॉलिवुड में भी अच्छा नाम कमाया है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि नैनीताल जैसी जगह में अब तक एक प्रेक्षागृह भी नहीं है। इंद्ररीस मलिक ने बताया कि उत्तराखण्ड से 40/50 लोग N.S.D/F.T.I.I से स्नातक हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ दो लोग उत्तराखण्ड में काम कर रहे हैं। बाकी कलाकार सरकार की उदासीनता के कारण पलायन कर गए क्योंकि सरकार ने संस्कृति को सीरियसली नहीं लिया। उन्होंने कहा कि हमारे असली कलाकार गांवों में हैं और पढ़े-लिखे नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें पता नहीं है, कि पंजीकरण क्या होता है और कहां होता है ?

इदरीस मलिक ने सरकार से किसी पद या आर्थिक सहायता की मांग नहीं कि है, बल्कि सिस्टम को ठीक करने की मांग करते हुए पर्यटन को संस्कृति से जोड़ने और रोजगार सृजित करने के संबंध में कुछ सुझाव दिए हैं।

पर्यटन को संस्कृति से कैसे जोडें- राजस्थान, केरला, गोवा की तर्ज पर उत्तराखण्ड में हर ए ग्रेड, बी ग्रेड होटल अनिवार्य रूप से एक सांस्कृतिक मंडली का होटल में प्रदर्शन कराएं। इससे हमारी संस्कृति प्रमोट होगी, दूसरा कलाकारों को रोजगार मिलेगा और होटल को भी फायदा होगा। भाषा संस्कृति को कैसे संभालें- स्कूल कक्षा 6 से 12 तक हमारी भाषा/लोक् नाट्य/नाटकों का एक विषय लागू कराएं। गढ़वाल और कुमाऊं में गुरुकुलों की स्थापना- दो गुरुकुलों की स्थापना हो एक कुमाऊं में दूसरा गढ़वाल में जिसमें 4 कोर्स हों 1. लोक नाट्य/नाटक (इण्डियन,क्लासिक,वैस्टर्न, थियेटर) 2.चित्रकला 3. फिल्मस 4. संगीत। गुरुकुल का अपना ऑडिटोरियम हो लाइब्रेरी हो, हॉस्टल हो।

उन्होंने कहा है कि उत्तराखण्ड अपनी फिल्म बनाता है, या अपनी भाषा की  फिल्म बनानी है तो सबसे पहले फिल्म को बेचने का प्रबन्ध होना चाहिए हर 30 किलोमीटर पर छोटे-छोटे पिक्चर हॉल बनाने होंगे जिसकी क्षमता 30 सिटर या 20 सिटर हो टिकट दर 20/30/50 से ज्यादा न हो। 2 हॉल बनाने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दें। महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर रिजनल फिल्म उत्तराखण्ड की फिल्म दिखाएं। फिल्में टैक्स मुक्त हो। पूरे उत्तराखण्ड में 5000 हॉलों का लक्ष्य होना चाहिए।