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शिक्षक प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक, उच्च शिक्षा से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर हुई वार्ता। सीएम ने उच्च शिक्षा हित में सकारात्मक निर्णय लेने का दिया आश्वासन।

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उत्तराखंड विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष तथा संरक्षक डॉ ओपी कुलश्रेष्ठ तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव डॉ देवेंद्र त्यागी के संयुक्त नेतृत्व में शिक्षक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से उच्च शिक्षा से जुड़े ज्वलंत विषयों पर वार्ता की। मुख्यमंत्री द्वारा सभी उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से समझा तथा सकारात्मक निर्णय उच्च शिक्षा तथा राज्य के हित में लिए जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

शिक्षक प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें बताया गया कि अब तक उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय, (उत्तरांचल अनुकूलन एवं अंतरण अधिनियम आदेश 2001) प्रभावी था। जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 को अंगीकृत किया गया था, जिसके आधार पर सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन का पूर्ण दायित्व राज्य सरकार पर है, परंतु उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2020 में चैप्टर XI-A Payment of salary to teachers and other employees of degree colleges शामिल नहीं किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री से विचार-विमर्श कर इस चैप्टर को जोड़े जाने हेतु यह कहकर आश्वस्त किया कि शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा यह भी कहा गया कि अगर शिक्षकों की नई नियुक्तियों की नीतियों में परिवर्तन किया भी जाता है, तो पूर्व में सेवारत शिक्षकों की सेवा शर्तों तथा वेतन आदि अप्रभावित रहेंगे।

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि शासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में अनुदान के कारण ही छात्र-छात्राओं से नाम मात्र का शिक्षण शुल्क लिया जाता है, तथा अनुदान बंद होने से छात्र-छात्राओं की फीस 10 से 20 गुना बढ़ जाएगी इस पर मुख्यमंत्री द्वारा आश्वस्त किया गया कि उत्तराखंड के होनहार छात्र-छात्राओं के शैक्षिक हितों की रक्षा के लिए उनकी सरकार कटिबद्ध है तथा केंद्र की मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुसार उन्हें अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

अनुदानित महाविद्यालयों की संबद्धता केंद्रीय विश्वविद्यालय हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल) से होने के कारण राज्य सरकार के द्वारा दिए जाने वाले अनुदान प्रभावित होने की आशंका आदि पर स्पष्ट किया गया कि सहायता प्राप्त शासकीय महाविद्यालयों की संबद्धता किस विश्वविद्यालय के साथ हो यह शासन के स्तर का विषय है तथा यह महाविद्यालय 2009 के पार्लिमेंट एक्ट के तहत हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से शैक्षणिक रूप से संबद्ध हैं, तथा इसका प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

मुख्यमंत्री द्वारा कहा गया कि उत्तर प्रदेश में भी राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में संशोधन किया गया है, और पूर्ण वेतन की ग्रांट उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में भी नहीं दी जा रही है। जिस पर शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने यह स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शत प्रतिशत वेतन ग्रांट उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही है, तथा प्रोत्साहन धनराशि मात्र उन self-finance महाविद्यालयों को दी जा रही है जो कि असेवित क्षेत्रों में संस्थाओं द्वारा खुले जाते हैं तथा एक निर्धारित अवधि तक उच्च शिक्षा में सेवा दे रहे होते हैं।