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श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पद से हटाया, कुलपति ने आगे की कार्रवाई के लिए शासन को पत्र प्रेषित किया।

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श्रीदेवसुमन विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुधीर बुड़ाकोटी की कार्यप्रणाली पर सख्त रूख अपनाते हुए उनके उनके द्वारा निष्पादित किए जाने वाले सभी कार्यों पर रोक लगाने के साथ ही 14 दिसंबर 2020 से उन्हें विश्वविद्यालय में अनुपस्थित मानते हुए शासन को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया है।

विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखण्ड शासन को जारी में कहा गया है कि कुलसचिव सुधीर बुड़ाकोटी द्वारा 2 दिसंबर 2020 को विश्वविद्यालय में बिना अधोहस्ताक्षरी अनुमोदन के कार्यभार ग्रहण किया गया, तथा 3 दिसंबर 2020 से बिना अनुमति के विश्वविद्यालय मुख्यालय से अनुपस्थित रहने  एवं विश्वविद्यालय के वाहन को मुख्यालय से अन्यत्र ले जाने के कारण 9 दिसंबर को 2 दिन के अंतर्गत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने एवं मुख्यालय में उपस्थित होने हेतु निर्देशित किया गया था, किन्तु सुधीर बुड़ाकोटी न तो मुख्यालय में उपस्थित हुए और ना ही स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।

जिसके चलते अगले ही दिन 10 दिसंबर को विश्वविद्यालय ने इनके विभागीय वाहन के प्रयोग पर रोक लगा दी। कुलपति के इन आदेशों के बाद कुलसचिव ने विभागीय वाहन तो लौटा दिया लेकिन वह खुद विश्वविद्यालय मुख्यालय में उपस्थित नहीं हुए। जिसके बाद सोमवार 14 दिसंबर को कुलपति पी. पी. ध्यानी ने सुधीर बुडाकोटी द्वारा कुलसचिव श्रीदेवसुमन विश्वविद्यालय की हैसियत से राजकीय कार्यों के निर्वहन हेतु सभी कार्यकलापों को प्रतिबंधित कर दिया और विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद को रिक्त घोषित करते हुए शासन को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया है। शासन को जारी पत्र में कहा गया है कि सुधीर बुडाकोटी विश्वविद्यालय मुख्यालय में उपस्थित नहीं है, इसलिए उनका विश्वविद्यालय में कुलसचिव के पद पर बना रहना विश्वविद्यालय हित में नहीं है। अत: 14 दिसंबर से श्रीदेवसुमन विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद को रिक्त समझा जाए।

मामले पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. पी. ध्यानी ने कहा कि कुलसचिव सुधीर बुडाकोटी की संदिग्ध कार्य प्रणाली पर विश्वविद्यालय ने सख्त रूख अपनाते हुए उनके द्वारा निष्पादित किए जाने वाले सभी कार्यों पर रोक लगा दी है, और आगे की कार्रवाई के लिए शासन को सूचित कर दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई शासन को करनी है।