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प्रदेश में 2 नवंबर से खुलने हैं स्कूल, लेकिन प्राइवेट स्कूल संचालकों ने एसओपी की कई शर्तों को मानने से किया इंकार।

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उत्तराखंड में 2 नवंबर से 10 वीं व 12 वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले जाने हैं, लेकिन निजी स्कूल अब भी असमंजस में हैं और उन्होंने स्कूल खोलने को लेकर सरकार के सामने कई शर्तें रखी दी है। निजी स्कूल संचालकों ने 50 प्रतिशत से कम बच्चों के स्कूल आने पर स्कूल खोलने में असमर्थता जताई है। मंगलवार को एसओपी पर चर्चा करते हुए प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ने इसका फैसला लिया। उन्होंने एसओपी में कई खामियों का आरोप लगाते हुए सचिव शिक्षा डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम  से उन्हें सुधारने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक इन खामियों को सुधारा नहीं जाता, स्कूल खोलना मुश्किल है।

पीपीएसए के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी डे और बोर्डिंग स्कूल के साथ लगातार हुई बैठकों और विचार-विमर्श के बाद ये तय किया है कि कम से कम पचास प्रतिशत अगर स्कूल आते हैं तो ही स्कूल खुल सकेंगे क्योंकि स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर तमाम इंतजाम करने हैं।

उन्होंने कहा कि एसओपी में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल की होने की बात कही गई है, ऐसे में स्कूल प्रिंसिपल या प्रबंधक पर कानूनी कार्रवाई संभव है, इसका विरोध किया जा रहा है। अत: इस शर्त को हटाया जाए। बोर्डिंग स्कूलों में हर बच्चे और स्टाफ की 72 घंटे पहले की नेगेटिव कोरोना रिपोर्ट मुख्य शिक्षा अधिकारी को देने की बाध्यता रखी गई है। जबकि बोर्डिंग स्कूलों में बच्चे घर से अलग-अलग दिन पहुंचेंगे। ऐसे में रोजाना उनकी रिपोर्ट मुख्य शिक्षा अधिकारी को देना संभव नहीं है। मांग की है कि रिपोर्ट स्कूलों में ही रखी जाए। उसे विभाग या जिला प्रशासन के अधिकारी आकर देख सकते हैं या सारी रिपोर्ट आने के बाद ही उसे सीईओ दफ्तर भिजवाए जाने की छूट दी जाए।

इसके अलावा उन्होंने हॉस्टल में दो बेड के बीच में अस्थाई पार्टीशन के निर्देश को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि स्कूल दो बेड के बीच में पर्याप्त दूरी रख रहे हैं। केवल उन्हीं छात्रों व स्टाफ को एंट्री दी जाएगी, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव होगी। ऐसे में पार्टीशन करने से बच्चा खुद को अकेला और तनाव में महसूस करेगा।