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दुनियाभर में हुए दंगों में फेसबुक पर उठे सवाल।

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फेसबुक के असर और उसकी पॉलिसी को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हाल ही में अपनी एक खबर में दावा किया था कि फेसबुक की सीनियर अधिकारी अंखी दास ने बीजेपी से जुड़े नेताओं की हेट स्पीच पर बैन लगाने का विरोध किया और कहा था कि बीजेपी से जुड़े नेताओं की हेट स्पीच पर फेसबुक ने दोहरे मापदंड अपनाए।

फेसबुक के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की बात खुलकर सामने आई है। दिल्ली के दंगे हो या बेंगलुरु, पश्चिम बंगाल में हिंसा। मुजफ्फनगर में बवाल हो या स्वीडन-अमेरिका-श्रीलंका और लंदन में उपद्रव। हर जगह फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट कर दंगे भड़काए गए। केन्द्र सरकार ने भी संसद को बताया था कि 2017-18 में आपत्तिजनक पोस्ट की करीब 2245 शिकायतें फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया साइट से की गई थी। बाद में इनमें से 1662 विवादित पोस्ट हटा ली गई। इनमें 900 से अकेले फेसबुक ने हटाई थी।

फेसबुक भी सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने से रोकने के लिए तमाम तरह के दावे करता आया है, लेकिन आज तक कंपनी न तो ठोस नीति बना सकी है और न ही कोई ऐसा सुरक्षातंत्र विकसित कर सकी जिससे भड़काऊ पोस्ट पर रोक कर माहौल खराब होने से रोका जा सके। पूरी दुनिया में इसके खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। जब भी आवाज उठाई जाती है तो महज कुछ खातों को सस्पेंड करने के अलावा कुछ नहीं होता। जब तक खाते बंद किए जाते हैं तब तक हजारों लोग उस पोस्ट की वजह से दंगों की आग में झुलस चुके होते हैं। यूपी के मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में भी ऐसे सवाल उठे थे।

घृणा भरे भाषणों से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर आलोचना का सामना कर रही फेसबुक ने सोशल मीडिया पर हिंसा और नफरत फैलाने में तेलंगाना के भाजपा विधायक टी राजा सिंह को प्रतिबंधित कर दिया है। भाजपा नेता को फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी इंस्टाग्राम से भी बैन किया गया है। फेसबुक ने बृहस्पतिवार को कहा, हिंसा-घृणा को लेकर कंपनी की नीतियों का उल्लंघन करने पर भाजपा विधायक को बैन किया गया है। रिपोर्ट में राजा सिंह की एक पोस्ट का हवाला दिया गया था , जिसमें कथित रूप से अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की वकालत की गई थी। फेसबुक ने आश्वस्त किया है कि हम अपनी नीति के अनुरूप भारत में सार्वजनिक शख्सियतों द्वारा हमारे प्लेटफार्मों पर डाली गई घृणा वाली सामग्री हटाते रहे हैं और हटाते रहेंगे। फेसबुक पर भाजपा और कांग्रेस दोनी ही लोगों की राय को प्रभावित करने के आरोप लगाते रहे हैं।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों के बीच फेसबुक ने बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि वह मतदान को प्रोत्साहित करने, गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने जा रहा है। फेसबुक ने यह भी दावा किया किया है कि हिंसक गतिविधियां न फैंले, इसके लिए भी कवायद की जा रही है।