Home अपना उत्तराखंड उद्यान और कृषि विभाग के एकीकरण के खिलाफ कर्मचारी आंदोलन को तैयार

उद्यान और कृषि विभाग के एकीकरण के खिलाफ कर्मचारी आंदोलन को तैयार

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कृषि और उद्यान विभाग के एकीकरण के खिलाफ कार्मिकों ने बांहे चढ़ानी शुरू कर दीं। उद्यान विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के पांच संगठनों ने एक मंच पर आते हुए संयुक्त उद्यान कार्मिक संगठन का गठन किया है। संगठन एकीकरण के मुददे पर सरकार के सामने विभागीय कार्मिकों का पक्ष रखेगा। जरूरत पड़ने संगठन आंदोलन का निर्णय भी ले सकता है। रविवार को गांधी रोड स्थित एक धर्मशाला में उद्यान विभाग के औद्यानिक अधिकारी संगठन, तकनीकी कर्मचारी संगठन, मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन, चतुर्थ श्रेणी संगठन और वाहन चालक संघ के पदाधिकारियों ने आपात बैठक की। मालूम हो कि अभी हाल में विभागीय समीक्षा के दौरान कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने दोनों विभागों के एकीकरण का निर्णय किया है। अभी इसका खाका तैयार किया जा रहा है। बैठक में एकीकरण के फैसले को कर्मचारी विरोधी बताते हुए विरोध करने का निर्णय किया गया। संयुक्त संगठन बनाते हुए इसकी एक उच्च स्तरीय कोर कमेटी बनाई गई है। डॉ. एसके सिंह इसके संयोजक होंगे। जबकि सदस्य के रूप में कमल किशोर जोशी, दीपक पुरोहित, भोपाल सिंह, चंद्रमोहन पंत, अरविंद बिजल्वाण, एलएम रावत, जगदीश बिष्ट, नागेंद्र तिवारी, हीरावल्लभ जोशी, प्रमोद राठौर को रखा गया है। संयोजक डॉ. सिंह और सदस्य दीपक पुरोहित ने कहा कि एकीकरण होने से कृषि और उद्यान विभाग के कार्मिकों के हित प्रभावित होंगे। दोनों सेक्टर अलग हैं। क़ृषि पर फोकस की जरूरत है तो उद्यान विभाग पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है। एकीकरण से सारी व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। जल्द ही इस मुद्दे पर कृषि-उद्यान मंत्री से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा जाएगा।बैठक में डॉ. नरेंद्र यादव, डॉ. ब्रजेश गुप्ता, मंगल सेन, कैलाश चंद्र बुधानी आदि भी मौजूद रहे। राज्यहित में है एकीकरण: सुबोध देहरादून। कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि दोनों विभागों का एकीकरण राज्यहित में है। दोनों विभाग एक समान प्रकृति के हैं। कृषि और बागवानी सेक्टर पर ज्यादा बेहतर तरीके से फोकस किया जा सकेगा। उन्होंने विभागीय कार्मिकों को आश्वस्त किया कि उनके हितों पर लेशमात्र भी आंच न आने दी जाएगी। दोनों विभागों के कार्मिकों की अपनी-अपनी सीनियरटी रहेगी और उसका समय-समय पर लाभ मिलेगा। यदि कार्मिकों को किसी भी प्रकार की आशंका है तो वो अपनी बात भी रख सकते हैं।