Home खास ख़बर संसदीय समिति आज करेगी फेसबुक विवाद की सुनवाई।

संसदीय समिति आज करेगी फेसबुक विवाद की सुनवाई।

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भारतीय राजनीति में फेसबुक के असर और उसकी पॉलिसी को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने हाल ही में अपनी एक खबर में दावा किया था कि कैसे बीजेपी से जुड़े नेताओं की हेट स्पीच पर फेसबुक ने दोहरे मापदंड अपनाए। तब से राजनीति में फेसबुक के असर को लेकर विवाद चल रहा है, फेसबुक को लेकर चल रहे विवाद के बीच सूचना प्रौद्योगिकी मामलों की संसदीय समिति आज बैठक करेगी। इस बैठक में फेसबुक के प्रतिनिधि कंपनी का पक्ष रखने के लिए शामिल होंगे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि शरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने फेसबुक के प्रतिनिधियों को तलब किया था। इस बैठक में सोशल मीडिया के दुरुपयोग के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। लोकसभा सचिवालय ने पिछले महीने इस बैठक की सूचना भेजी थी फेसबुक के प्रतिनिधियों के अलावा इस बैठक में इलैक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया था कि फेसबुक की सीनियर अधिकारी अंखी दास ने बीजेपी से जुड़े नेताओं की हेट स्पीच पर बैन लगाने का विरोध किया, इस दावे के बाद देश में इस मामले ने काफी तूल पकड़ा। कांग्रेस की तरफ से आधिकारिक तौर पर फेसबुक को इस मसले पर पत्र भी लिखे जा चुके हैं। राहुल गांधी यहां तक आरोप लगा चुके हैं कि फेसबुक-वॉट्सऐप पर बीजेपी और आरएसएस का कब्जा है और इसका इस्तेमाल वो फेक न्यूज व नफरत फैलाने के लिए करते हैं।

हेट स्पीच विवाद पर विपक्ष के हमले के बीच केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने फेसबुक को लेकर मौजूदा विवाद पर यह पत्र लिखा है, रविशंकर प्रसाद ने कहा साल 2019 के चुनाव से पहले फेसबुक इंडिया प्रबंधन ने दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों के पेज डिलीट कर दिए या उनकी पहुंच कम कर दी। फेसबुक को संतुलित व निष्पक्ष होना चाहिए।

आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि रिपोर्ट है कि फेसबुक इंडिया टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी एक विशेष राजनीतिक विचारधारा क समर्थक हैं। फेसबुक के कर्मचारी प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्रियों को अपशब्द कहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यह भी बताना चाहता हूं कि हाल ही में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां फेसबुक का उपयोग अराजक और कट्टरपंथी तत्वों द्वारा किया गया है। जिनका एकमात्र उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करना और लोगों को हिंसा के लिए इकट्ठा करना है, हमने अभी तक ऐसे तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं देखी है।