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ऑनलाइन पढ़ाई- छात्र के घर नहीं है फोन, तो पड़ोसी के फोन पर पढ़ाने के आदेश।

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कोरोना संकट के कारण स्कूल-कॉलेज जैसे सभी शिक्षण संस्थान बंद है। लेकिन इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई को मंजूरी दी है। सरकार ऑनलाइन पढाई को मजबूत करने के लिए तरह-तरह के विकल्प भी अपना रही है। टीवी पर दूरदर्शन के माध्यम से भी पढ़ाई का विकल्प चुना गया है। लेकिन उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में ऑनलाइन पढ़ाई शिक्षकों के साथ ही बच्चों व उनके अभिभावकों के लिए भी चुनौती भरा साबित हो रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई में जहां खराब नेटवर्क बाधा बन रहा है, तो वहीं कई बच्चों के घरों में स्मार्टफोन नहीं हैं।

केन्द्र सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नया कार्यक्रम प्रज्ञाता तैयार किया है। जिसके तहत उत्तराखण्ड में भी शिक्षक अपने स्तर पर अपने स्कूल के छात्रों का सर्वे करेंगे। इसमें देखा जाएगा कि कितने छात्रों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट, लैपटॉप, बेसिक फोन की सुविधा है। जिनके पास सुविधा नहीं होगी, शिक्षक उन्हें संसाधन वाले दूसरे छात्रों के साथ जोडेंगे। ऑफलाइन पढ़ने वाले बच्चों के लिए संस्कृत, विज्ञान, गणित और सामाजिक अध्ययन के लिए पाठ तैयार किए गए हैं, शिक्षक यह सामग्री छात्रों को देंगे।

केन्द्र सरकार के प्रज्ञाता फार्मूले के अनुसार संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर छात्रों की चार श्रेणियां बनाई जाएंगी। ए-जिनके पास टेलीविजन, इंटरनेट, स्मार्टफोन व लैपटॉप है। बी- इंटरनेट, स्मार्टफोन, टेलीविजन है पर लैपटॉप नहीं है। सी- केवल सामान्य फोन है, और डी- सामान्य मोबाइल फोन भी नहीं है, इन श्रेणियों के आधार पर शिक्षक पढ़ाई का फार्मेट तैयार करेंगे। प्रदेश में निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण ने सभी सीईओ को इसे लागू करने के आदेश दिए हैं।

केन्द्र सरकार के इस गाइडलाइन के बाद अब शिक्षकों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई आसान नहीं होगी, जिंन छात्र- छात्राओं के पास टेलीविजन, इंटरनेट, स्मार्टफोन और लैपटॉप, टीवी है उन्हें इन माध्यमों से पढ़ाना होगा। जिनके पास सामान्य फोन हैं, उनके साथ सुबह बात करनी होगी ताकि बाद में उनके माता-पिता घर से न निकल जाएं। साथ ही ऐसे छात्र जिनके पास फोन नहीं है, उनके पड़ोस के छात्रों को फोन कर, उक्त छात्रों के माता-पिता को प्रेरित करना होगा कि, वे पड़ोस के छात्रों साथ पढ़ाई कर सकें।