Home उत्तराखंड उत्तराखण्ड- नई शिक्षा नीति लागू करने की कवायद को कमेटी का गठन।

उत्तराखण्ड- नई शिक्षा नीति लागू करने की कवायद को कमेटी का गठन।

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केन्द्र सरकार ने देश में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है, अब इस लागू करने के लिए कवायद भी शुरु हो गई है। हमारे देश में अब तक स्कूली पाठ्यक्रम 10 + 2 के अनुसार चलता था, लेकिन नई शिक्षा नीति में यह 5 + 3 + 3 + 4 के अनुसार होगा। यानी प्राइमरी से दूसरी क्लास तक एक हिस्सा, फिर दूसरा हिस्सा तीसरी से पांचवीं तक, तीसरा हिस्सा छठी से आठवीं और आखिरी हिस्सा नौवीं से 12वीं तक। बारहवीं में बोर्ड परीक्षा होगी, लेकिन इसमें कुछ बदलाव होंगे।

साथ ही अब ग्रेजुएट कोर्स में एक साल पर सर्टिफिकेट, 2 साल पर डिप्लोमा, 3 साल पर डिग्री मिलेगी। अब कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल दोनों की होगी। जिन छात्रों को उच्च शिक्षा नहीं देनी है, उनके लिए 3 साल की डिग्री। उसकी एजुकेशन स्टूडेंट्स को 4 साल की डिग्री करनी होगी, उनके लिए एक साल में एमए करने की व्यवस्था होगी।

उत्तराखण्ड में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए समिति का गठन कर दिया गाया है, समिति 40 दिन में अपने सुझाव शासन के समक्ष रखेगी। कमेटी के अध्यक्ष गढ़वाल विवि के पूर्व वीसी व मौजूदा सलाहकार उच्च शिक्षा प्रो. एमएसएम रावत होंगे। कमेटी में राज्य के विवि के सभी कुलपति, निदेशक उच्च शिक्षा, उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन समिति व शासन स्तर से सचिव स्तर के अधिकारी बतौर सदस्य रहेंगे।

विशेषज्ञों ने बताया कि बहुविषयक शिक्षा के प्रावधान के तहत स्नातक उपाधि तीन या चार वर्ष की होगी। छात्रों को किसी भी विषय या क्षेत्र में एक साल पूरा करने पर प्रमाण पत्र, दो साल पर डिप्लोमा, तीन वर्ष की अवधि के बाद स्नातक डिग्री मिलेगी। 4 वर्ष के कार्यक्रम में शोध सहित डिग्री दी जाएगी। पीएचडी को या तो स्नातकोत्र डिग्री या शोध के साथ चार वर्ष की स्नातक डिग्री अनिवार्य होगी। नई नीति में तीन प्रकार के शिक्षण संस्थान होंगे।

विशेषज्ञों ने राज्य शिक्षा आयोग के गठन पर जोर दिया है, कहा है कि राज्य के महाविद्यालयों को स्वायतशासी महाविद्यालय, विश्वविद्यालयों को बहुविषय विवि बनाया जाए। कोर्स स्ट्रक्चर तैयार किए जाएं। वार्षिक परीक्षा प्रणाली खत्म कर सेमेस्टर सिस्टम लागू हो, हर जिले में समावेशी महाविद्यालय बने।