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महाशिवरात्रि पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग।

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शुक्रवार को महाशिवरात्रि का पर्व देशभऱ में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार महाशिवरात्रि के पर्व पर 117 साल बाद ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने पर गुरु, शुक्र, चंद्रमा एवं शनि के कुंडली में खराब योग से मुक्ति मिलेगी। इस दुर्लभ ग्रह संयोग में किया हुआ जलाभिषेक मानवता के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन के लिए भी शुभ रहेगा। अभिषेक का फल अलग-अलग प्राप्त होता है।

कुश के जल से असाध्य रोगों में श्रेयस्कर दही से अभिषेक करने पर भूमि एवं भवन का लाभ, वाहन का लाभ, घी से धन वृद्धि, तीर्थ जल से मोक्ष प्राप्ति, इत्र से बीमारी में आराम, दूध से पुत्र प्राप्ति, शक्कर से विद्वता की प्राप्ति, सरसों के तेल से टीबी का इलाज और दूध, मधु, घी, जल, दही और बेलपत्र से अभिषेक करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

वहीं धर्मनगरी हरिद्वार में जल लेने के लिए लाखों कांवड़ियों ने डेरा डाल लिया है। हालत यह है कि गंगा पार केवल कांवड़िए दिखाई दे रहे हैं। कांवड़ियों का आवागमन लगातार जारी है। हरिद्वार में पड़ोसी जिलों से बहुत बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंचे हैं। कंधे पर कांवड़ रखे पैदल कांवड़ियों के साथ ही वाहनों पर जल लेने पहुंचे कांवड़िए भी खूब देखने को मिल रहे हैं।