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इस फैसले की वजह से सुर्खियों में आए थे सुप्रीम कोर्ट के नए न्यायाधीश जस्टिस जोसेफ

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उत्तराखंड हाईकोर्ट में जस्टिस जोसेफ का मुख्य न्यायाधीश पद पर कार्यकाल अब तक के सभी न्यायाधीशों से अधिक रहा है। वे चार वर्ष तीन दिन तक मुख्य न्यायाधीश रहे।  31 जुलाई 2014 को उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति ली थी। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनने के बाद अब सोमवार को फुल कोर्ट रिफ्रेंस की संभावना है।

17 जून 1958 को जन्मे जस्टिस केएम जोसेफ की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय कोच्चि तथा बाद में नई दिल्ली के लोयोला कॉलेज चेन्नई तथा गर्वमेंट लॉ कालेज ऐरनाकुलम से हुई थी। जस्टिस जोसेफ का पंजीकरण एक अधिवक्ता के रूप में 12  जनवरी 1982 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने सिविल और अन्य वादों में पैरवी के साथ अपना कैरियर शुरू किया। जस्टिस जोसेफ ने 1983 को केरल हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। वे वहां के हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के स्थायी सदस्य भी रहे। जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में 14 अक्तूबर 2004 को हुई।

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त होने के बाद मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने विदाई दी। उनकी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त की पुष्टि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल नरेंद्र दत्त ने की। सोमवार को फुल कोर्ट रिफ्रेंस में जस्टिस जोसेफ को विदाई दी जाएगी। जस्टिस जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सूचना मिलने के बाद शुक्रवार को उनकी मेडिकल संबंधी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ फैसले से सुर्खियों में आए थे जस्टिस जोसेफ
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और जस्टिस बीके बिष्ट की पीठ ने मार्च 2016 में सिंगल बेंच के फैसले को उचित मानते हुए उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को अवैध करार दिया था। इस दौरान कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ तीखी टिप्पणियां भी की थीं। मार्च 2016 को कांग्रेस के 9 विधायकों ने पार्टी से बगावत कर दी थी। इसके बाद तत्कालीन हरीश रावत की सरकार अल्पमत में आ गई थी। विपक्ष के नोटिस पर बहुमत के लिए तय फ्लोर टेस्ट की तारीख 27 मार्च 2016 से पहले ही केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया था।

जस्टिस जोसफ के अन्य प्रमुख फैसले

जस्टिस जोसफ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहने के दौरान सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज, पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं देने, बंदरों एवं जंगली सुअरों के आतंक, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग प्रकरण, नगरों में कचरा फेंकने, शिक्षकों की हड़ताल खुलवाने, एनएच 87 में धांधली प्रकरण में, कोसी और दाबका नदियों में अवैध खनन, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के मित्र संजय नारंग सहित कई उल्लेखनीय मामलों में निर्णय दिए।
सूचना मिलने पर बीच सुनवाई से उठ गए जस्टिस जोसेफ
शुक्रवार को लगभग 12 बजे जस्टिस केएम जोसेफ तथा जस्टिस शरद शर्मा की पीठ हाईकोर्ट में सुनवाई कर रही थी। इसी बीच, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल नरेंद्र दत्त ने कोर्ट में आकर जस्टिस जोसेफ के कान में कुछ कहा। इस पर जस्टिस जोसेफ मुस्कुराए। साथ बैठे जस्टिस शरद शर्मा ने उनसे कहा, बधाई। कॉलेजियम की ओर से जस्टिस जोसेफ की पदोन्नति संबंधी सिफारिश दोबारा भेजे जाने के बाद से यह कयास लगाया जा रहा था कि जस्टिस जोसेफ की पदोन्नति की सूचना कभी भी आ सकती है।  इसके तुरंत बाद जस्टिस जोसेफ परंपरा के अनुरूप उसी समय सुनवाई छोड़कर कोर्ट से उठ कर चले गए। सुप्रीम कोर्ट के लिए पदोन्नत होने के बाद जस्टिस जोसेफ ने उत्तराखंड में बिताए वक्त को यादगार बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वास्तव में देव भूमि है। इस अवधि में उन्हें हाईकोर्ट बार से पूरा सहयोग मिला।

तय मानी जा रही थी जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति 
पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने 10 जनवरी को जस्टिस जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति  की सिफारिश की थी। उस समय केंद्र सरकार ने इस सिफारिश संबंधी फाइल को 26 अप्रैल को लौटा दिया था। कॉलेजियम ने 11 मई को सैद्धांतिक रूप से जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए जाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद 20 जुलाई 2018 को कॉलेजियम ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को न्यायमूर्ति जोसेफ को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए नाम भेजने का फैसला किया। उसी समय जस्टिस जोसेफ का सुप्रीम कोर्ट का जज बनना तय हो गया था।  कॉलेजियम की ओर से हाईकोर्ट के किसी जज की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति संबंधी सिफारिश दूसरी बार होने पर सरकार के लिए संबंधित न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया जाना आवश्यक होता है। सूत्रों की माने तो ऐसी स्थिति इससे पहले कभी नहीं आई कि कॉलेजियम को दोबारा किसी जज के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजना पड़ा हो।

पूर्व में चार सीजे और एक जज हो चुके हैं पदोन्नत

supreme court

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इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय में रहे चार मुख्य न्यायाधीश तथा एक जज प्रोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट में जा चुके हैं।  पूर्व में उत्तराखंड हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस एसएच कपाड़िया, जस्टिस वीएस सिरपुरकर तथा जस्टिस सीरियक जोसेफ प्रोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं। इनमें जस्टिस खेहर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी बने। इसके अलावा यहां न्यायाधीश रहे जस्टिस पीसी पंत भी बाद में सुप्रीम कोर्ट के जज बने। कई मौकों पर वरिष्ठ न्यायाधीशों की उपलब्धता के बावजूद उनसे कनिष्ठ न्यायाधीश भी सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस राजीव गुप्ता, जस्टिस बारिन घोष तथा जस्टिस अशोक देसाई पर्याप्त वरिष्ठता के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के लिए पदोन्नत नहीं हुए थे। हाईकोर्ट के प्रथम न्यायाधीश अशोक देसाई ने पर्याप्त वरिष्ठता के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के लिए पदोन्नत नहीं होने पर हाईकोर्ट में सेवानिवृत्ति से दो माह पूर्व इस्तीफा दिया था।

दिल्ली में उत्तराखंड के हितों का ध्यान रखेंगे : जस्टिस जोसेफ
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अभिनंदन किया। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि उत्तराखंड मेरा दूसरा घर है। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली में उत्तराखंड के हितों की रक्षा करेंगे।
हाईकोर्ट बार सभागार में आयोजित समारोह में जस्टिस जोसेफ ने अधिवक्ताओं से कहा कि वे पूरी तैयारी के साथ कोर्ट में जायें। उन्होंने कहा कि बेहतर न्याय व्यवस्था के लिये बार व बेंच में सामंजस्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली में रहते हुए उत्तराखंड के हितों का पूरा ध्यान रखेंगे। न्यायाधीश बीके बिष्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ हर मामले का गहराई से अध्ययन करते रहे हैं। उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं को भी उनका अनुसरण करना चाहिए। हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष ललित बेलवाल ने कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के इतिहास में यह खुशी का क्षण है। उत्तराखंड हाईकोर्ट से कई न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय पहुंच चुके हैं। इस मौके पर बार के रजिस्ट्रार जनरल नरेन्द्र दत्त, सचिव नरेंद्र बाली, पूर्व अध्यक्ष सैयद नदीम मून, एमएस त्यागी, विवेक शुक्ला, बीसी पांडे, एमसी पांडे, टीएस फत्र्याल, राजेश जोशी, गीता परिहार समेत अनेक अधिवक्ता शामिल थे।