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होली के गीतों में भी दिखाई दे रही है, गैरसैंण राजधानी बनने की खुशी

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गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने पर प्रदेश में खुशी का माहौल है, अपनी खुशी अब लोग होली के गीतों से भी बयान कर रहे हैं, परंपरागत चांचरी, भगनौल व होली गायन करने वाले होल्यारों की जुबां पर गैरसैंण राजधानी का रंग छाया है। होल्यार अपने गायन के माध्यम से गैरसैंण राजधानी बनने से चहुमुखी विकास व समस्याओं के निदान की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि साथ ही साथ गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग भी तेज हो गई है|

चौखुटिया व आस-पास के क्षेत्रों में खड़ी होली में गैरसैंण राजधानी से जुड़े गीत खूब रंग जमा रहे हैं| पांडुवाखाला काखा चौखुटिया बाजारा, गैरसैंण राजधानी हैगेछ अब हौल विचारा, अल्मोड़ा, रानीखेता तल काखा गगासा, गैरसैंण राजधानी आपुणी अब हौल विकासा। ग्रीष्मकालीन बनगे राजधानी, त्रिवदें ज्यू तुमरी जयजयकारा हो, अब स्थाई बनै दियो तुमरी जयजयकारा हो। इसी क्रम में बढ़ती महंगाई की ओर इशारा करते हुए -हरिया साड़ी लाल बिलौजा, चऊनी कसा बूंट, सौ रूपैं क नोट म्यर चाहा पांणी में टूट, सहित ज्वलंत मुद्दों से जुड़े गीत खूब रंग जमा रहे हैं। मौसम ठंडा होने केे बावजूद भी बुजुुर्ग होलियार पूरे जोश से होली गा रहेे  हैंं|