Home उत्तराखंड हल्द्वानी- सुशीला तिवारी अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं से मरीज परेेशान।

हल्द्वानी- सुशीला तिवारी अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं से मरीज परेेशान।

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हल्द्वाानी का सुशीला तिवारी अस्पताल में हल्द्वानी, नैनीताल, रामनगर से ही नहीं बल्कि कुमाऊं मण्डल के पहाड़ी क्षेत्रों से भी मरीज अच्छा इलाज मिलने की उम्मीद से आते हैं। लेकिन यहां पहुंचकर मरीजों को अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं से दो- चार होना पड़ता जिसके चलते मजबूरन मरीज प्राइवेट अस्पतालों का रुख करते हैं, या फिर दिल्ली आदि शहरों की तरफ जाते। कई बार गंभीर स्थिति में मरीज दम तक तोड़ जाते हैं।

कोरोना संकट के बीच एसटीएच हल्द्वानी को कोविड अस्पताल घोषित किया गया और कोरोना पॉजिटिव मरीजों का यहां इलाज किया जा रहा है। लेकिन कोरोना काल में यहां व्यवस्थाएं और अधिक पटरी से उतरती नजर आई। मुख्यमंत्री व कुमाऊं आयुक्त के निर्देशों के बाद भी सुशीला तिवारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन ने कोई सख्त कदम नहीं उठाए, जिसका नतीजा ये हुआ कि आए दिन इन अव्यवस्थाओं का खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अव्यवस्थाओं के चलते कल रात भी सुशीला तिवारी अस्पताल में ढाई घण्टों तक जमकर हंगामा हुआ, क्योंकि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों को दस दिन से अधिक हो जाने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। यहां तक कई मरीजों की डिस्चार्ज स्लिप पर 3 दिन होम क्वारंटाइन भी लिखा गया।

हंगामा तब हुआ जब मरीजों को गौलापार क्वारंटाइन सेंटर भेजा जाने लगा, इस बात से नाराज़ होकर डिस्चार्ज हुए मरीजों ने खूब हंगामा किया। हालांकि कुछ मरीज क्वारंटाइन सेंटर जाने के लिए राजी भी हो गए थे, लेकिन ज़्यादातर मरीजों का यही कहना था कि हमारे साथ नाइंसाफी की जा रही है। पहले ही अस्पताल में हमें सुविधाओं के नाम पर गंदगी मिली और ट्रीटमेंट के नाम पर सिर्फ एक कैप्सूल दिया गया, अब जब हमारे घर जाने का समय आया तब भी हमें ज़बरदस्ती क्वारंटाइन सेंटर भेजा जा रहा है।

गुरुवार को भी सुशीला तिवारी अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई थी, जिस पर प्रशासन द्वारा संज्ञान तो लिया गया लेकिन कार्यवाही अब तक नहीं की गई है। गुरुवार को सुशीला तिवारी अस्पताल में एक गर्भवती महिला के कोरोना पॉजिटिव होने पर उसका पर्चा बनाने में ही साढ़े सात घण्टे लगा दिए। गर्भवती महिला लाचारी में खुले आसमान के नीचे पूरी रात फर्श पर ही बैठी रही, लेकिन अस्पताल की ओर से महिला को कोई राहत नहीं मिली। बताया गया कि इमरजेंसी में जो डॉक्टर तैनात थे सुबह उन्होंने ये सब देखा तब उन्हें तरस आया और महिला को शुक्रवार की सुबह 7.30 बजे भर्ती किया गया।

महिला का पति कोरोना निगेटिव था उसने कहा कि मेरी पत्नी गर्भवती है, और कोरोना पॉजिटिव है। जो पर्चा न बनने की वजह से खुले आसमान के नीचे बैठी है, अगर इससे कोरोना औरों को फैल गया तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है? सुशीला तिवारी अस्पताल में अव्यवस्थाओं की कहानी आये दिन सामने आती रहती है। पहले जिला प्रशासन द्वारा मामला संज्ञान में नहीं है कहा जाता था, लेकिन अब मामला संज्ञान में है कहकर कार्यवाही की बात तो जिला प्रशासन करता है पर व्यवस्थाओं को ठीक नहीं किया जाता।