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ग्रामीणों ने पेश की मिशाल, बिना किसी सरकारी मदद के कर रहे वृक्षारोपण। प्रवासियों को मिल रहा रोजगार।

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कोरोना संकट के चलते उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रवासी अपने घर लौटे हैं। कोरोना ने कई लोगों के रोजगार पर असर डाला। लेकिन इस संकट के बीच उत्तराखण्ड के पहाड़ों से कुछ सुखद तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर ग्रामीण खुद के प्रयास से गांव तक सड़क बनाने का कार्य कर रहे हैं, तो कई स्थानों पर बंजर पड़ चुकी जमीन को फिर से आबाद करने का प्रयास किया जा रहा है।

ऐसी ही एक सुखद तस्वीर अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे ब्लॉक अंतर्गत छ्याणी गांव से सामने आई है, जहां ग्रामीणों द्वारा बिना किसी सरकारी सहायता के वृक्षारोपण का कार्य किया जा रहा है। इस वृक्षारोपण कार्य में खास बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा चलाए गए इस वृक्षारोपण अभियान में प्रवासियों को रोजगार भी मिल रहा है।

दिल्ली में रहने वाले हरेन्द्र, जीवन, कीर्तिपाल, देवेन्द्र भंड़ारी, देवी सिंह कुबेर सिंह, चंदन सिंह युवाओं ने आपस में मिलकर फंड इक्ट्ठा किया और उस फंड का उपयोग वह गांव में इस कार्य के लिए कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से पेड़ लगाने के लिए गड्ढे खोदने का कार्य चल रहा है। अब तक 250 से अधिक गढ्डे पेड़ लगाने के लिए खोदे जा चुके हैं, जबकि 400 से अधिक पेड़ लगाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रत्येक गढ़ढे के लिए खोदने वाले को 12 रूपए प्रति गड्ढा भुगतान भी किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही घर लौटे प्रवासियों को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।

गांव की सरपंच आनंदी देवी वृक्षारोपण कार्यक्रम में भरपूर सहयोग कर रही हैं। गांव के युवक कीर्तिपाल सिंह ने हमसे बाचतीच के दौरान बताया कि हमारा उद्देश्य बांज व फलदार वृक्ष लगाना है, जिससे कि पानी की समस्या भी दूर हो सके और रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकें। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 200 से अधिक वृक्ष लगाए गए थे, लेकिन इस बार 400 से अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि गड्डे खोदने का कार्य जारी है, और हरेला पर्व के शुभअवसर पर पेड़ लगाए जाएंगे।