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फ्रंट फुट पर बैटिंग करते नजर आ रहे हैं एचआरडी मिनिस्टर निशंक

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देहरादून : मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जी ने केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के साथ कई दौर के गहन विचार-विमर्श के बाद उन्हें नया मंत्र दिया है। उन्होंने संस्थानों से कहा कि वे लीक से हटकर कुछ नया करें। इसके लिए उन्हें जिन संसाधनों की जरूरत होगी उनको उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद एक पखवाड़े में डॉ निशंक जी ने सवा सौ से भी अधिक महत्वपूर्ण केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ अलग-अलग बैठकें की हैं। इनमें आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, केंद्रीय विवि और अन्य स्वायत्त संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों के प्रमुखों को भरोसे में लेते हुए डॉ निशंक ने उन्हें दो टूक कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र में नया करें। जो संस्थान जिस क्षेत्र में काम कर रहा है, उसमें नए विचारों के साथ काम करे और उसका ज्यादा और सीधे फायदा लोगों तक पहुंचे।

इसके लिए सरकार की तरफ से संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। हर प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी वह लेते हैं। उन्होंने केंद्रीय विवि, यूजीसी, एआईसीटीई, सीबीएसई आदि से शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के उपाय करने को कहा है। दूसरे, सभी केंद्रीय शिक्षण संस्थानों से कहा गया है कि वे शिक्षकों के खाली पदों को तुरंत भरें। एक बैठक में उन्होंने यहां तक कहा कि अगर किसी संस्थान में शिक्षकों के पद खाली हैं तो माना जाएगा कि वहां पढ़ाई नहीं होती। अब इसमें कोई कोताही नहीं चलेगी।

संस्थानों से कार्ययोजना मांगी केंद्रीय मंत्री डाॅ रमेश पोखरियाल निशंक जी ने सभी संस्थानों के प्रमुख से सौ दिन, एक साल और पांच साल की कार्य योजना भी मांगी है। इसके अलावा बैठकों के बाद डॉ निशंक उसके प्रभाव को लेकर भी संस्थानों से फीडबैक ले रहे हैं। वे मंत्रालय में हर छोटे बड़े अधिकारी के कमरे में जाकर मुलाकात भी कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बैठकों में डॉ निशंक ने जहां संस्थानों के प्रमुखों पर भरोसा जताया है और उन्हें बेहतर करने के लिए प्रेरित किया है, वहीं कोताही बरतने पर सख्त रुख अपनाने के भी संकेत भी दे दिए हैं।

मोदी 2.0 में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद देश ही नहीं अपितु विदेशों से भी डॉ निशंक को शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा हुआ है जो अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।प्रतिदिन हजारों की संख्या में समर्थक तथा ब्यूरोक्रेट्स शुभकामनाएं देने या तो उनके 13 तीनमूर्ति लेन स्थित आवास में पहुंच रहे हैं या फिर शास्त्री भवन स्थित मंत्रालय के उनके कार्यालय में। डॉ साहब हमेशा से ही जनसुलभ नेता रहे हैं, लोगों से मिलना उनको समय देना उनके व्यवहार की प्रारंभिक खूबियों में से एक है। जब वे मुख्यमंन्त्री थे, उस वक्त भी जनता से वन-टू-वन संवाद का मुकाबला शायद ही कोई कर पाए।

सामान्य प्रक्रिया है कि जब आप लोगों के साथ ज्यादा से ज्यादा संवाद कायम करने का प्रयास करेंगे तो आपके कार्य तथा दिनचर्या निश्चित रूप से प्रभावित होगी। लेकिन मैंने आज तक कभी डॉ साहब के साथ ऐसा होता देखा नहीं। जब हम पूर्व में कभी डॉ साहब की दिनचर्या की चर्चा करते थे तो बहुत से लोग स्वीकार करने की स्थिति में नहीं होते थे कि डॉ साहब पूरे दिन में मुश्किल से रुतीन घण्टे भी नहीं सोते होंगे। जो लोग उनको करीब से नहीं पढ़ पाते थे वे हमारी बातों से हंसते थे।

फ्रंट फुट पर बैटिंग करते नजर आ रहे हैं एचआरडी  मिनिस्टर डाॅ निशंक

30 मई 2019 को मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के पश्चात जो फ्रंट फुट पर बैटिंग नजर आयी है वो काबिले तारीफ है।
शपथ ग्रहण के अगले ही दिन …..

31 मई को मंत्रालय में कार्य भार सम्हाल लिया, शीर्ष अधिकारियों की बैठक ले डाली, नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट भी ग्रहण कर लिया। उसी दिन शाम को कैबिनेट की प्रथम बैठक में हिस्सा लिया तथा अपने मंत्रालय की रिपोर्ट को बखूबी बैठक में रखा।

1 जून को पूर्व मुख्यमंन्त्री खंडूड़ी जी, कोश्यारी जी, मुख्यमंन्त्री त्रिवेंद्र जी की शुभकामनाएं ग्रहण की तथा उनके साथ राज्य के शैक्षिक उत्थान को लेकर विस्तृत चर्चा भी की। डॉ साहब ने कहा कि ये समय कार्य करने का है, हम जनता के लिए ज्यादा से ज्यादा क्या कर पाएं हरवक्त इसी बिंदु पर कार्य होना चाहिए।
उसी दिन राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री रामलाल जी से भेंट की।

2 जून को रविवार होने की स्थिति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (न्ळब्) के चेयरमैन डॉ डी पी सिंह के साथ अपने आवास पर बैठक कर विभागीय रिपोर्ट का अध्ययन किया तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया।

3 जून को पूर्व विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज जी से मिलने के उपरांत वे पूर्व भ्त्क् मंत्री श्री मुरली मनोहर जोशी जी तथा पूर्व भ्त्क् मंत्री व वर्तमान वन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी से मिले। मंत्रालय को तीव्र गति से संचालित करने हेतु मार्गदर्शन प्राप्त किया।

4 जून को केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी के साथ बैठक हुई तथा विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक ली गयी।

5 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी के साथ भेंट की तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यावसायिक शिक्षा के जरिये कौशल और रोजगार सृजित करने की योजनाओं तथा इस हेतु चलाये जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

6 जून त्रिपुरा के मुख्यमंन्त्री श्री विप्लब् कुमार देव से मुलाकात कर वहां किस प्रकार से कार्य किया जाना है इस हेतु बैठक हुई। मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में शिक्षा को रोजगारपरक तथा प्रौद्योगिकी युक्त बनाने पर चर्चा हुई।

7 जून को भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू जी से मुलाकात की। हिमांचल के मुख्यमंन्त्री श्री जयराम ठाकुर जी से मुलाकात कर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।

10 जून महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के साथ बैठक में विश्विद्यालयों की ताजा स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा हुई, उसके बाद उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया जी के साथ बैठक में भाग लिया।
पर्यटन संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल जी के साथ मुलाकात कर उनके क्षेत्रों में कार्य की रूपरेखा पर चर्चा हुई।
एडसिल इंडिया लिव की टीम के साथ बैठक, शैक्षिक जगत में प्रैद्योगिकी के अधिक से अधिक उपयोग पर व्यापक चर्चा।
उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री श्री अरविंद पांडेय जी से मुलाकात।

11 जून तमिलनाडु के राज्यपाल श्री बनवारी लाल जी, अरुणांचल के राज्यपाल ब्रिगेडियर (से नि) बी डी मिश्रा जी तथा हिमांचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी के साथ पृथक पृथक बैठकों में शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा की।
निजी कॉलेजों की अखिल भारतीय एशोसिएशन के साथ बैठक।
केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियो के साथ बैठक।

12 जून निजी विद्यालय फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट पर चर्चा।
राष्ट्रीय प्रैद्योगिकी संस्थानों की समीक्षा बैठक
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (प्प्ैम्त्) के निदेशकों के साथ बैठक।

13 जून भाषा संस्थानों के साथ बैठक।
बीस भारतीय प्रबंधन संस्थानों के साथ विचार विमर्श।
उच्चतर शिक्षा विभाग के अंतर्गत केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपतियों के साथ बैठक।
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर तथा छज्ज्त् चेन्नई के प्रतिनिधियों के साथ बैठक।
असम के मुख्यमंन्त्री श्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ बैठक।

14 जून गोवा के मुख्यमंन्त्री श्री प्रमोद सामंत के साथ बैठक।
आईआईटी तथा आईआईआईटी के निदेशकों के साथ बैठक।

निश्चित रूप से ऐसी कार्यप्रणाली के लिए टीम के वो जिम्मेदार सदस्य भी बधाई के पात्र हैं जो समर्पण भाव से डॉ साहब के साथ कदम दर कदम कार्य कर रहे हैं।

पिछले 15 दिनों में जो भी विभागीय बैठकें हुईं है, उन बैठकों के अनुसार कार्य लगभग प्रारम्भ हो चुके हैं। शीघ्र ही मंत्रालय ग्रामीण आँचल में पहुंच कर शिक्षा की बुनियादी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ शिक्षा को व्यवसायिक शिक्षा में भी परिवर्तित करेगा। ऐसी आम जन की अपेक्षा है।