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केंद्र ने जारी किया तीन साल से रुका RTE बजट, स्कूल प्रबंधकों को जल्द मिलेगा बकाया

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शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा आरटीआई का रूका हुआ पैसा राज्य सरकार को मिल चुका है, जिसे जल्द ही पूरे प्रदेश के आरटीई के तहत पढ़ाई करवाने वाले प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों को प्रतिपूर्ति के रूप में दे दिया जायेगा। साथ ही तीन सालों से छात्रों को ड्रेस, मिड डे मील के  2100 रुपये भी छात्रों को मिल जायेंगे।
दरअसल, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) एक्ट के तहत पब्लिक स्कूलों में कोटे की 25% सीटों पर एडमिशन पाने वाले लगभग एक लाख से अधिक बच्चों को तीन साल से प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई थी। तीन सालों ने बजट ना मिलने की वजह से राज्य सरकार को इस योजना को सुचारू रूप से चलाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। प्रदेश का आरटीई का 210 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रुका हुआ था ।

बजट के रुकने की वजह से जिसकी वजह से 3,009 स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग एक लाख 5 हजार छात्रों की फीस नहीं दी गयी थी। तीन सालों से बजट के लिए केंद्र सरकार का मुंह ताक रही प्रदेश सरकार को आखिरकार बजट मिल ही गया है।

गौर हो कि प्रदेश में वर्ष 2011-12 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। एक्ट के लागू होने से लेकर अबतक 1 लाख  से अधिक गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को पब्लिक स्कूलों में कोटे की 25 फीसदी सीटों पर दाखिला दिया गया है।

नियमानुसार इन बच्चों की शिक्षा प्रतिपूर्ति (फीस एवं अन्य खर्च)  केंद्र को वहन करना था, लेकिन केंद्र की ओर से प्रदेश को शिक्षा प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई थी। शिक्षा प्रतिपूर्ति समय पर न मिलने से कई स्कूलों ने गरीबों के इन बच्चों को स्कूल से निकालना शुरू कर दिया था और गरीबों के एडमिशन देने से आनाकानी कर रहे थे।

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि सबको शिक्षा का अधिकार देने की बात करने वाली सरकार शिक्षा के प्रति गंभीर क्यों नहीं हो रही है। ऐसे लापरवाह रवैये की वजह से प्राइवेट स्कूलों के साथ सरकार का यह अनुबंध भी खतरे में पड़ सकता है। इससे लाखों बच्चों का भविष्य अंधकार में जा सकता है।