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अल्मोड़ा- प्रदेश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक और गर्भवती की ली जान।

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सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लाख दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बने स्वास्थ्य केन्द्र आज भी सिर्फ रैफर सेंटर बने हुए हैं। जिस कारण अनेकों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। ऐसा ही एक मामला बागेश्वर के कांडा से अल्मोड़ा आई महिला के साथ हुआ। जिसने उचित स्वास्थ्य सेवा न मिल पाने के कारण अल्मोड़ा महिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।

बागेश्वर जिले के कांडा की बनेगांव निवासी गीता देवी (25) पत्नी राजेंद्र कुमार गर्भवती थी। गुरुवार सुबह उनकी प्रसव पीड़ा बढ़ी तो परिजन उसे कांडे अस्पताल लेकर गए। वहां से उसे बागेश्वर के जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार वहां चिकित्सकों ने व्यवस्था न होेने का हवाला देते हुए उसे अल्मोड़ा महिला अस्पताल रैफर कर दिया। जिसे 108 आपातकालीन सेवा की मदद से अल्मोड़ा लेकर लाया गया।

देर रा़त्रि महिला अस्पताल में लाई गई इस गर्भवती महिला का परीक्षण कर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला अस्पताल की चिकित्सक डाॅ हेमा ने बताया कि महिला 9 माह के गर्भ से थी। जब उसे अस्पताल में लाया गया उससे पहले ही वह दम तोड़ चुकी थी। अस्पताल ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी गई। जिसके बाद एसआई संतोष देवरानी मौके पर पहुंचे और महिला के शव को जिला अस्पताल के मोर्चारी में रखवाया। शुक्रवार को महिला के शव का पोस्टमार्टम कर उसे परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यस्थाओं का खस्ता हाल का यह कोई पहला मामला नहीं है। प्रदेश के पहाड़ी जनपदों में अब तक कई लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। बागेश्वर जनपद के जिला अस्पताल में यदि गर्भवती का इलाज करने लायक पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी, तो समझा जा सकता है कि अन्य छोटे अस्पतालों में स्थिति क्या होगी।