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डीटीसी की पहली और इकलौती महिला ड्राइवर सिर्फ 3 साल में छोड़ना चाहती है नौकरी, ये है वजह

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बड़े सपनों और बेहतर भविष्य की आस में 30 वर्षीय सरिता ने जब डीटीसी की पहली महिला बस ड्राइवर के रूप में पदभार संभाला तो कभी नहीं सोचा था कि जल्द ही उन्हें ये नौकरी छोड़ने की नौबत आ जाएगी। मात्र 18 वर्ष की उम्र से ही ड्राइविंग कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही सरिता ने डीटीसी में संविदा कर्मी के रूप में नौकरी शुरू की थी लेकिन तीन साल बीत जाने पर भी न उन्हें परमानेंट किया गया न ही उनकी सैलरी बढ़ाई गई है।

सरिता तेलंगाना की रहने वाली हैं और उन्होंने तीन साल पहले डीटीसी की प्रथम महिला चालक के रूप में नौकरी शुरू की थी। वह आनंद विहार से कापसहेड़ा के बीच लंबे और सबसे अधिक व्यस्त रहने वाले रूट पर बस चलाती हैं। भले ही वह बस में चालक होती हैं लेकिन अक्सर ही उन्हें मनचलों से जेब कतरों तक का सामना करना पड़ता है। लेकिन वह इन सब से कभी घबराई नहीं और वह अन्य लड़कियों को भी निडर रहने को कहती हैं।

सरिता जैसे डीटीसी बस ड्राइवरों और कंडक्टरों को कोई भी साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता। दुख की बात तो ये है कि बिना छुट्टी के भी पूरे महीने काम करने पर उन्हें सैलरी के नाम पर मिलते हैं सिर्फ 12 हजार रुपए। यही वजह है कि बढ़ती महंगाई और टूटती उम्मीदों के बीच सरिता ने नौकरी छोड़ वापस तेलंगाना जाने का मन बना लिया है। उनके अनुसार इतनी सैलरी में बड़े शहर में गुजारा करना काफी मुश्किल है।

यह जानकर आप उनके जज्बे और हौसले को सलाम करेंगे कि उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन वो कहती है कि पुरस्कारों से घर नहीं चलते, उसके लिए पैसे चाहिए। वो कहती हैं कि अपने घर तेलंगाना से और अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ वो यहां सिर्फ इसी आस में आई थीं कि उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी तो सैलरी से लेकर पेंशन सब की सुविधा हो जाएगी। लेकिन तीन साल बाद भी जो हालात हैं उससे वह टूटने लगी हैं।

सरिता की जिंदगी कभी भी आसान नहीं रही। पांच बहनों में सबसे छोटी सरिता ने 18 साल की उम्र में ही ऑटो चलाना शुरू कर दिया था। बहनों की शादी से लेकर अपना घर बनाने तक का काम सरिता के ऑटो चलाने से होने वाली आमदनी से ही हुआ। वह चाहती हैं कि अन्य लड़कियां भी छोटे गांवों से निकलकर शहरों तक पहुंचे और अपना मुकाम हासिल करें। हालांकि अब वह परमानेंट नौकरी न हो पाने और सैलरी न बढ़ने के चलते डीटीसी बस चलाने से कतराने लगी हैं।