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अब हड़ताल नहीं कर सकेंगे राज्य कर्मचारी, हाई कोर्ट ने सरकार को दिए ये निर्देश

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प्रतीकात्मक फोटो

अब राज्य के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह हड़ताल को गैरकानूनी घोषित करे और यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो उन पर कर्मचारी सेवा नियमावली 1966 की धारा चार लागू करे। सरकार हड़ताल कर रहे कर्मचारी संगठनों की मान्यता रद कर दे और उन पर जुर्माना लगाए।

राज्य कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर तमाम विभागों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। जिसका हाईकोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लिया गया था। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित कर दी और बहाना वित्त मंत्री प्रकाश पंत के साथ वार्ता में बनी सहमति का बनाया। गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए सख्त आदेश पारित किया है।

खंडपीठ  ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टॉफ भी हड़ताल पर जा रहे हैं, जबकि इनपर हजारों लोगों के जीवन को बचाने की जिम्मेदारी होती है। इसी तरह शिक्षकों के हड़ताल पर जाने से राज्य का शैक्षणिक माहौल खराब हो गया है। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़क शिक्षा जैसी मूलभूत सेवाओं को कर्मचारी रोक रहे हैं, जो लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के खिलाफ है। जिससे हजारों लोगों का हित प्रभावित होता है।

इन तथ्यों के आधार पर खंडपीठ ने कहा कि आवश्यक सेवाओं को बहाल रखना जरूरी है। इसलिए राज्य में हड़ताल गैर कानूनी घोषित की जाय। जिसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ स्थानीय निकाय व निगम भी शामिल हैं। आदेश में हड़ताल के खिलाफ कठोर टिप्पणी की है तथा कहा कि हड़ताली कर्मी वेतन के हकदार नहीं हैं। इसलिए इन पर नो वर्क-नो पे का सिद्धांत लागू किया जाए। उनकी सर्विस ब्रेक कर दी जाए और उन पर जुर्माना लगाया जाए। इसके अलावा हड़ताल में शामिल एसोसिएशन व फेडरेशन की मान्यता वापस ली जाए ।

खंडपीठ ने कर्मचारियों की जायज मांगों को पूरा करने के लिए सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने के निर्देश सरकार को दिए हैं। इस कमेटी में संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष व कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कमेटी का गठन आठ हफ्ते के भीतर करने व कमेटी की बैठक हर तीन माह में आवश्यक रूप से करना आदेश में शामिल है। इन निर्देशों के साथ हाई कोर्ट ने जनहित याचिका निस्तारित कर दी है ।